STD 8 So.Sci. Material
कक्षा :-8 सामाजिक विज्ञान(गुजरात बोर्ड) विषय के प्रथम सत्र के सभी एकम के हरेक मुद्दे को समाविष्ट करनेवाले फोटोस, चार्ट्स, मानचित्र ....
15 अगस्त, 2013 से...
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आपने डाउनलोड की हुई .Zip फाइल को PC में Unzip करने के लिए डाउनलोड की गई फाइल पर Right Click करके Extract Here करना है । स्मार्टफोन से भी आप Androzip, RAR जैसी Apps से ये कार्य कर सकते हैं ।
આભાર - પંકજભાઈ
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- HOME
- પાઠયપુસ્તક
- શિક્ષક આવૃતિ
- બાલસૃષ્ટી
- પ્રાર્થનાપોથી
- ધોરણ - ૫ થી ૮ કવિતા
- ભારતીય બંધારણ
- ઈતિહાસ ફોટા
- નાગરીકશાસ્ત્ર ફોટા
- ભૂગોળ ના ફોટા
- ખંડો વિશે
- S.S.CALENDAR
- WORLD ATLAS
- ધોરણ - ૬ થી ૮ ના હેતુઓ
- સામાજિક વિજ્ઞાન નવનીત
- ધોરણ - ૬ થી ૮ એકમ કસોટી બન્ને સત્ર
- ધોરણ - ૮ સત્ર - ૧ PPT
- ધોરણ – ૮ સત્ર- ૧ એકમ ક્વિઝ
- ધોરણ – ૮ સત્ર- ૨ PPT
- ધોરણ – ૮ સત્ર- ૨ VIDEO
- ધોરણ – ૮ સત્ર- ૨ એકમ ક્વિઝ
- ધોરણ – ૮ સત્ર- ૨ PHOTA
- ધોરણ – 7 સત્ર- ૨ PPT
- ધોરણ – 7 સત્ર- ૨ VIDEO
- દેશભક્તિ ગીત
- ધોરણ – ૭ સત્ર- ૨ એકમ ક્વિઝ
- ધોરણ – 7 સત્ર- ૨ PHOTA
- ધોરણ – 6 સત્ર- ૨ PPT
- ધોરણ – 6 સત્ર- ૨ VIDEO
- ધોરણ – 6 સત્ર- ૨ PHOTA
- ધોરણ – ૭ સત્ર- ૧ એકમ ક્વિઝ
- ભારતના રાષ્ટ્રચિહ્નો
- ગાંધી હેરીટેજ પ્રોટલ
- भारतकोश:कॅलण्डर
# A R Y A #
Thursday, 12 September 2019
STD 8 So.Sci. Material
Monday, 5 August 2019
ધો.8 ના તમામ વિષયમાં ઉપયોગી ફાઇલ
STD-8
મિત્રો... અહીંયા ધો.8 ના તમામ વિષયમાં ઉપયોગી ફાઇલ મુકવામાં આવેલ છે જે તમને ખૂબ જ ઉપયોગી થશે...,,☺
સા.વિજ્ઞાન(પ્રથમ સત્ર)
☺All In One Material ☺
1.પ્રકરણ-1(ભારતમાં યુરોપિયન પ્રજાનું આગમન)
2. પ્રકરણ-2(આપણી આસપાસ શું ?)
3.પ્રકરણ-3(ભારતનું બંધારણ)
4.પ્રકરણ-4(વેપારી શાસકો કેવી રીતે બન્યા ?)
5.પ્રકરણ-5(પ્રાકૃતિક પ્રકોપો)
6.પ્રકરણ-6(અંગ્રેજ શાસનની ભારત પર અસર)
7.પ્રકરણ-7(આબોહવાકીય ફેરફારો)
8.પ્રકરણ-8(લોકશાહી દેશમાં સંસદની ભૂમિકા)
9.પ્રકરણ-9(ઈ.સ.1857 નો સ્વાતંત્ર્ય સંગ્રામ)
સા.વિજ્ઞાનનું ઉપયોગી અન્ય Material
☺ પ્રથમ સત્ર☺
3.
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12. પ્રકરણ-3(ભારતમાં રાષ્ટ્રવાદ)
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સા.વિજ્ઞાનનું ઉપયોગી અન્ય Material
વધુ મટેરિઅલ સમયાંતરે મુકવામાં આવશે... મારા દ્વારા બનાવેલ મટેરિઅલ મેળવવા માટે બ્લોગની મુલાકાત લેતાં રહેશો
ગુજરાતી પ્રથમ સત્ર
☺All In One Material ☺
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20. પ્રકરણ-10(બહેનનો પત્ર)
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ગુજરાતીનું ઉપયોગી અન્ય Material
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અંગ્રેજી( પ્રથમ સત્ર)
2. Unit-2(LMBB: Learn more be brighter)
અંગ્રેજી( દ્વિતીય સત્ર)
1. Unit-1(I Will Be That)
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Wednesday, 17 January 2018
Tuesday, 16 January 2018
Saturday, 6 January 2018
Thursday, 4 January 2018
સામાજિક વિજ્ઞાન ધોરણ - 8 ટૂંક જવાબી પ્રશ્નો / MCQ / એકમ કસોટી / કોમ્પ્યુટર ગેમ
પ્રથમ સત્ર
સામાજિક વિજ્ઞાન એકમ કસોટી પ્રથમ સત્ર
એકમ કસોટી ધોરણ ૦૮ : CLICK HERE
ટૂંક જવાબી પ્રશ્નો ધોરણ ૦૮ : CLICK HERE
ધોરણ ૦૮ પ્રથમ સત્ર MCQ : Click Here
ધોરણ 08 દ્રિતીય સત્ર imp : click here
PDF ફાઇલ
PDF ફાઇલ
- બાળવાર્તા નગરી
- LMG ARUN A શોર્ટકટ કી
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ-૬
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ-૭
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ-૮
- ઉ૫ચારાત્મક સામગ્રી વાચન અને લેખન માટે
- આપણા જીવનમાં પિતાનું મહત્વ
- વિકલ્પ પ્રશ્નો વિજ્ઞાન અને ટેક્નોલોજી પ્રથમ સત્ર ધોરણ- ૭
- વિકલ્પ પ્રશ્નો સામાજિક વિજ્ઞાન પ્રથમ સત્ર ધોરણ- ૭
- તફાવત આપો- વિજ્ઞાન અને ટેક્નોલોજી પ્રથમ સત્ર ધોરણ- ૭
- જોડકાં જોડો સામાજિક વિજ્ઞાન પ્રથમ સત્ર ધોરણ-૭
- ગુજરાતી ધોરણ-૭ પ્રથમ સત્ર સમાનાર્થી,વિરુદ્ધાર્થી શબ્દો
- વિકલ્પ પ્રશ્નો સામાજિક વિજ્ઞાન ધોરણ-૭ દ્વિતીય સત્ર
- તફાવત આપો- વિજ્ઞાન અને ટેક્નોલોજી દ્વિતીય સત્ર ધોરણ-૭
- વિરુદ્ધાર્થી શબ્દો દ્વિતીય સત્ર ધોરણ-૭
- શબ્દસમૂહ માટે એક શબ્દ ધોરણ-૭ દ્વિતીય સત્ર
- ગુજરાતી ધોરણ-૭ દ્વિતીય સત્ર સમાનાર્થી/વિરુદ્ધાર્થી શબ્દો
- સમાનાર્થી શબ્દો ધોરણ-૭ દ્વિતીય સત્ર
- ખાલી જગ્યા પૂરો સામાજિક વિજ્ઞાન ધોરજ્ઞ-૭ દ્વિતીય સત્ર
- તફાવત આપો- વિજ્ઞાન અને ટેક્નોલોજી દ્વિતીય સત્ર ધોરણ-૭
- વિકલ્પ પ્રશ્નો વિજ્ઞાન અને ટેક્નોલોજી ધોરણ- ૭ દ્વિતીય સત્ર
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ- ૧ અને ૨
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ-૩
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ-૪
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ-૫
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ- ૬
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ- ૭
- શાળાકીય સર્વગ્રાહી મૂલ્યાંકન હેતુઓ ધોરણ- ૮
Saturday, 23 December 2017
Thursday, 14 December 2017
फ़ारवर्ड ब्लॉक
फ़ारवर्ड ब्लॉक
फ़ारवर्ड ब्लॉक नाम की एक नई पार्टी का गठन नेताजी सुभाषचन्द्र बोस द्वारा अप्रैल, 1939 ई. में किया गया था। 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' के 'हरिपुरा अधिवेशन' में 19 फ़रवरी, 1938 ई. को सुभाषचन्द्र बोस को अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस के 'त्रिपुरा अधिवेशन' में सुभाषचन्द्र बोस पुनः कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये थे, परन्तु गाँधी जी के विरोध के चलते उन्होंने त्यागपत्र दे दिया तथा अप्रैल, 1939 ई. मे 'फ़ारवर्ड ब्लॉक' नाम की एक नई पार्टी का गठन किया। उल्लेखनीय है कि सुभाषचन्द्र बोस के त्याग पत्र के पश्चात् डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था।
स्थापना
महात्मा गाँधी से मतभेद हो जाने पर मार्च, 1919 ई. में समाजवादी, अतिवादी नेता सुभाषचन्द्र बोस ने 'फ़ारवर्ड ब्लॉक' नामक संस्था की स्थापना की।
सुभाषचन्द्र बोस की गिरफ्तारी
ब्रिटिश सरकार ने सुभाषचन्द्र बोस को 2 जुलाई, 1940 ई. को विद्रोह भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। जेल में अनशन के कारण स्थिति नाजुक होने पर 5 दिसम्बर, 1940 ई. को उन्हें रिहा कर कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) स्थित एल्गिन रोड के उनके निवास स्थान पर नज़रबंद कर दिया गया।
वहाँ से सुभाषचन्द्र बोस 17 जनवरी, 1941 ई. को मौका पाकर भाग निकले। अफ़ग़ानिस्तान, इटली होते हुए वे जर्मनी पहुँचे। बर्लिन में उन्होंने जर्मनी के नात्सी नेता हिटलर से मुलाकात की। उन्होंने अपनी आगामी योजनाओं के प्रति हर सम्भव सहयोग प्राप्त करने का आश्वासान हिटलर से प्राप्त किया। इसके बाद सिंगापुर होते हुए वे जापान पहुँच गये।
कैप्टन मोहन सिंह
कैप्टन मोहन सिंह
कैप्टन मोहन सिंह का 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' में बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इन्होंने 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' की स्थापना 15 दिसम्बर, 1941 ई. में की थी। बाद में इस फ़ौज़ का नेतृत्व सुभाषचन्द्र बोस को 21 अक्टूबर, 1943 ई. को सौंपा गया।
फ़रवरी 1942 ई. में भारतीय सेना ने सिंगापुर के 'फ़रैर पार्क' में जापानियों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था।
इस समय ब्रिटिश सेना के अंग्रेज़ करनल हंट ने भारतीय सैनिकों को जापानियों के हवाले कर दिया।
जापानी सेना के मेजर फ़ूजीवारा ने भारतीय सैनिकों को एशियाई भाइयों की तरह संबोधित किया।
फ़ूजीवारा का कहना था कि भारतीय भी लम्बे समय से अंग्रेज़ों के अधीन जी रहे हैं।
इसके बाद ही कैप्टन मोहन सिंह ने अपने साथियों से कहा कि वो मातृभूमि की आज़ादी के लिए एक अलग सेना बनाएँ और जापानियों की मदद करें।
इसी के फलस्वरूप 1941 ई. में 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन कैप्टन मोहन सिंह के द्वारा किया गया।
अक्टूबर 1943 ई. को सुभाषचन्द्र बोस को फ़ौज का सर्वोच्च सेनापति बनाया गया।
फ़ौज के तिरंगे झण्डे के बीच में दहाड़ते हुआ शेर बनाया गया था, जो फ़ौज की वीरता का प्रतीक था।
'आज़ाद हिन्द फ़ौज' की तीन ब्रिगेड थीं, जिनका नाम- 'सुभाष ब्रिगेड', 'गांधी ब्रिगेड' और 'जवाहर ब्रिगेड' था।
फ़ौज में महिला रेजिमेंट का नाम 'लक्ष्मीबाई रेजिमेंट' था।
रास बिहारी बोस (अंग्रेज़ी: Rash Bihari Bose जन्म: 25 मई, 1886 - मृत्यु: 21 जनवरी, 1945)
रास बिहारी बोस
पूरा नाम
रास बिहारी बोस
जन्म
25 मई, 1886
जन्म भूमि
वर्धमान ज़िला, पश्चिम बंगाल
मृत्यु
21 जनवरी, 1945
मृत्यु स्थान
टोक्यो, जापान
नागरिकता
भारतीय
प्रसिद्धि
वकील, शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी
धर्म
हिंदू
अन्य जानकारी
रास बिहारी बोस प्रख्यात क्रांतिकारी तो थे ही, सर्वप्रथम आज़ाद हिन्द फ़ौज के निर्माता भी थे।
रास बिहारी बोस (अंग्रेज़ी: Rash Bihari Bose जन्म: 25 मई, 1886 - मृत्यु: 21 जनवरी, 1945) प्रख्यात वकील और शिक्षाविद थे। रास बिहारी बोस प्रख्यात क्रांतिकारी तो थे ही, सर्वप्रथम आज़ाद हिन्द फ़ौज के निर्माता भी थे। देश के जिन क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता-प्राप्ति तथा स्वतंत्र सरकार का संघटन करने के लिए प्रयत्न किया, उनमें श्री रासबिहारी बोस का नाम प्रमुख है। रास बिहारी बोस कांग्रेस के उदारवादी दल से सम्बद्ध थे। रास बिहारी बोस ने उग्रवादियों को घातक, जनोत्तेजक तथा अनुत्तरदायी आंदोलनकारी कहा। रासबिहारी बोस उन लोगों में से थे जो देश से बाहर जाकर विदेशी राष्ट्रों की सहायता से अंग्रेजों के विरुद्ध वातावरण तैयार कर भारत की मुक्ति का रास्ता निकालने की सोचते रहते थे। 1937 में उन्होंने 'भारतीय स्वातंय संघ' की स्थापना की और सभी भारतीयों का आह्वान किया तथा भारत को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया।
जीवन परिचय
प्रथम महायुद्ध में सशस्त्र क्रांति की जो योजना बनाई गई थी, वह रासबिहारी बोस के ही नेतृत्व में निर्मित हुई थी। सन् 1912 ई. में वाइसराय लार्ड हार्डिंग पर रासबिहारी बोस ने ही बम फेंका था। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की सारी शक्ति रासबिहारी बोस को पकड़ने में व्यर्थ सिद्ध हुई। सरकारी नौकरी में रहते हुए भी रासबिहारी बोस ने क्रांतिकारी दल का संघटन किया। इसका गठन करने के लिए रासबिहारी बोस को व्यापक रूप से देश का बड़ी ही सतर्कता से भ्रमण करना पड़ता था। रासबिहारी बोस के क्रांतिकारी कार्यों का एक प्रमुख केंद्र वाराणसी रहा है, जहाँ आप गुप्त रूप से रहकर देश के क्रांतिकारी आंदोलन का संचालन किया करते थे। वाराणसी से सिंगापुर तक क्रांतिकारियों का संघटन करने में आपको सफलता मिली थी। क्रांतिकारी कार्यों में आपके प्रमुख सहायक श्री पिंगले थे। 21 फरवरी, सन 1915 ई. का एक साथ सर्वत्र विद्रोह करने की तिथि निश्चित की गई थी किंतु दल के एक व्यक्ति द्वारा भेद बता दिए जाने के कारण योजना सफल न हो सकी। इतना अवश्य कहा जाएगा कि सन 1857 की सशस्त्र क्रांति के बाद ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का इतना व्यापक और विशाल क्रांतिकारी संघटन एवं षड्यंत्र नहीं बना था। भेद प्रकट हो जाने के कारण श्री पिंगले को तो फाँसी पर चढ़ना पड़ा किंतु श्री रासबिहारी बोस बच निकले। फिर रासबिहारी बोस ने विदेश जाकर क्रांतिकारी शक्तियों का संघटन कर देश को स्वाधीन करने का प्रयत्न किया।
भारतीय स्वातंत्रय संघ की स्थापना
बड़ी ही कुशलता तथा सतर्कता से आपने ठाकुर परिवार के एक व्यक्ति के पारपत्र के माध्यम से भारत से विदा ली और सन 1915 में जहाज द्वारा जापान रवाना हो गए। जब ब्रिटिश सरकार को विदित हुआ कि श्री रासबिहारी बोस जापान में हैं तो उन्हें सौंपने की माँग की। जापान सरकार ने इस माँग को मान भी लिया था किंतु जापान की अत्यंत शक्तिशाली राष्ट्रवादी संस्था ब्लेड ड्रैगन के अध्यक्ष श्री टोयामा ने श्री बोस को अपने यहाँ आश्रय दिया। इसके बाद किसी जापानी अधिकारी का साहस न था कि श्री बोस को गिरफ्तार कर सके। इस अवस्था में श्री बोस प्राय: आठ वर्षों तक रहे। अनंतर आपने एक जापान महिला से विवाह किया और वहीं रहने लगे। वहीं आपने भारतीय स्वातंत्रय संघ की स्थापना की। रासबिहारी बोस भारत की विभिन्न राष्ट्रीय भाषाओं के अच्छे ज्ञाता थे। इसी कारण इन्हें को देश में क्रांतिकारी संघटन करने में अभूतपूर्व सफलता मिली थी। जापान जाकर भी आपने भारतीय स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक कार्य किए। यहाँ जापानी भाषा का अध्ययन कर आपने इस भाषा में भारतीय स्वतंत्रता के संबंध में पाँच पुस्तकें लिखीं। इन पुस्तकों का जापान में व्यापक प्रचार प्रसार हुआ। श्री संडरलैंड की 'पराधीन भारत' शीर्षक पुस्तक का आपने जापानी भाषा में अनुवाद किया।
आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना
भारतीय स्वातंत्रय संघ के संस्थापन के अतिरिक्त आपने ही प्रथम आज़ाद हिन्द फ़ौज का संघटन किया। इस सेना के प्रधान श्री मोहन सिंह थे। इसी संघटन के आधार पर नेता जी श्री सुभाषाचंद्र बोस ने द्वितीय आज़ाद हिन्द फ़ौज का संघटन किया। श्री रासबिहारी बोस देश के स्वातंत्रयवीरों में अग्रगण्य हैं। क्रांतिकारी आंदोलन द्वारा भारत को पराधीनता से मुक्त करने के लिए आपने जो पराक्रम दिखाया, वह स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा
